गिरिडीह: जिले के तिसरी प्रखंड स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय दानोखूंटा में शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई नजर आ रही है। विद्यालय में 119 बच्चों का नामांकन होने के बावजूद मात्र 24 बच्चे ही उपस्थित पाए गए। वहीं तीन शिक्षकों की पदस्थापना के बावजूद विद्यालय में केवल एक शिक्षक मौजूद मिले। इस स्थिति ने विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था और विभागीय निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्रामीणों की शिकायत के बाद जब मीडियाकर्मी विद्यालय पहुंचे, तब विद्यालय के सचिव राकेश कुमार विभागीय बैठक में गए हुए थे। विद्यालय में एक शिक्षक बच्चों को पढ़ाते मिले, जबकि दूसरे शिक्षक तालो हांसदा, जो स्थानीय मुखिया के पति भी हैं, उपस्थिति दर्ज कराने के बाद विद्यालय से अनुपस्थित पाए गए। स्थानीय लोगों और छात्रों का आरोप है कि वे अक्सर हाजिरी बनाकर अन्य कार्यों के लिए निकल जाते हैं।
छात्राओं ने बताया कि स्कूल में नियमित रूप से पढ़ाई नहीं होती और तीन शिक्षकों के बावजूद कक्षाएं सुचारू रूप से संचालित नहीं की जाती हैं। इसके अलावा कई दिनों से मध्यान भोजन योजना भी बंद है। बच्चों को भोजन के स्थान पर केवल बिस्किट का पैकेट देकर औपचारिकता निभाई जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार बिना पूर्व सूचना के विद्यालय बंद भी रहता है।
ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षकों की लापरवाही के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिलने के कारण कई अभिभावक अपने बच्चों को लगभग चार किलोमीटर दूर लोकाय स्थित सरकारी विद्यालय में पढ़ाने को मजबूर हैं।
विद्यालय में मौजूद शिक्षक ने भी स्वीकार किया कि स्कूल में कई समस्याएं हैं। उन्होंने माना कि मध्यान भोजन कई दिनों से बंद है और शिक्षक तालो हांसदा की अनुपस्थिति को लेकर मिलने वाली शिकायतें सही हैं। उनके अनुसार, गर्मी की छुट्टियों से पहले बच्चों की उपस्थिति बेहतर थी, लेकिन वर्तमान में संख्या काफी कम हो गई है।
पत्रकारों के पहुंचने की सूचना मिलने के बाद शिक्षक तालो हांसदा भी विद्यालय पहुंचे। उन्होंने अपनी अनुपस्थिति पर सफाई देते हुए कहा कि मुखिया को विभिन्न कार्यों में उनकी आवश्यकता पड़ती है, जिसके कारण उन्हें कई बार विद्यालय छोड़कर जाना पड़ता है।
मामले में विद्यालय सचिव राकेश कुमार से फोन पर संपर्क किया गया तो उन्होंने विभागीय बैठक में व्यस्त होने की बात कही। हालांकि बाद में दोबारा संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
विद्यालय में 119 नामांकित बच्चों में से केवल 24 की उपस्थिति, मध्यान भोजन का बंद होना और शिक्षकों की अनियमित उपस्थिति शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। ग्रामीणों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषी शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई और विद्यालय की व्यवस्था में तत्काल सुधार की मांग की है।











