गिरिडीह: दिवंगत मंत्री एवं गिरिडीह के पूर्व विधायक सुदिव्य कुमार सोनू को लेकर भाजपा नेता कामेश्वर पासवान की कथित अमर्यादित टिप्पणी का मामला अब राजनीतिक तूल पकड़ने लगा है। इस बयान को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने कड़ी नाराजगी जताई है। बुधवार को झामुमो नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बयान की निंदा की और कामेश्वर पासवान से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की। नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि माफी नहीं मांगी गई तो पार्टी आंदोलन करने को बाध्य होगी।
कामेश्वर पासवान के बयान पर झामुमो ने जताया विरोध
प्रेस कॉन्फ्रेंस में झामुमो नेता मोहन दास ने कहा कि राजनीति में वैचारिक मतभेद और विरोध होना लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन राजनीतिक विरोध के नाम पर भाषा की मर्यादा नहीं भूलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी दिवंगत जनप्रतिनिधि के खिलाफ अमर्यादित टिप्पणी करना दुर्भाग्यपूर्ण है।
मोहन दास ने की सार्वजनिक माफी की मांग
मोहन दास ने कहा कि कामेश्वर पासवान को अपने कथित बयान पर सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने भाजपा नेतृत्व से भी अपने नेताओं की बयानबाजी पर नियंत्रण रखने की अपील की।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि माफी नहीं मांगी गई तो झामुमो आगे कड़ा कदम उठाएगा और उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा।
उप महापौर समेत कई नेताओं ने जताई नाराजगी
इस दौरान गिरिडीह के उप महापौर सुमित कुमार, नगर अध्यक्ष रॉकी सिंह और कृष्ण मुरारी शर्मा ने भी मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी। नेताओं ने कहा कि दिवंगत मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के प्रति इस तरह की टिप्पणी स्वीकार नहीं की जाएगी।
झामुमो नेताओं ने स्पष्ट किया कि पार्टी इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठेगी और सार्वजनिक रूप से माफी की मांग जारी रखेगी।
नगर निगम चुनाव को लेकर भी उठाए सवाल
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान झामुमो नेताओं ने नगर निगम चुनाव का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान कामेश्वर पासवान अपनी ही पार्टी के प्रत्याशी के खिलाफ अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल कर रहे थे, जबकि अब भाजपा के पक्ष में बयानबाजी कर रहे हैं।
नेताओं ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार बयानबाजी करना और किसी दिवंगत जनप्रतिनिधि को लेकर टिप्पणी करना उचित नहीं है।
भाजपा नेतृत्व के फैसले पर टिकी नजरें
झामुमो नेताओं ने भाजपा नेतृत्व से पूरे मामले को गंभीरता से लेने और अपने नेता के बयान पर उचित कार्रवाई करने की मांग की। अब इस मामले में भाजपा नेतृत्व की प्रतिक्रिया का इंतजार है। फिलहाल झामुमो ने स्पष्ट कर दिया है कि सार्वजनिक माफी नहीं मिलने पर आंदोलन का रास्ता अपनाया जा सकता है।











