झंडा मैदान में जुटे सैकड़ों शिक्षक, वेतन भुगतान में देरी और प्रशासनिक अनियमितताओं पर जताया आक्रोश
गिरिडीह: जिले के नवनियुक्त सहायक आचार्यों ने वेतन भुगतान में हो रही देरी को लेकर मंगलवार को स्थानीय झंडा मैदान में बैठक आयोजित की। बैठक में बड़ी संख्या में शिक्षकों ने हिस्सा लिया और सात से आठ महीने बाद भी वेतन नहीं मिलने पर गहरी नाराजगी जताई। शिक्षकों का कहना है कि नवंबर और दिसंबर में नियुक्ति के बावजूद अब तक उन्हें एक भी महीने का वेतन नहीं मिला है, जिससे आर्थिक और मानसिक परेशानियां लगातार बढ़ रही हैं।
आर्थिक संकट से जूझ रहे शिक्षक, कर्ज लेकर चला रहे परिवार
बैठक में शिक्षकों ने बताया कि नियमित वेतन नहीं मिलने के कारण कई परिवार आर्थिक संकट में हैं। कई शिक्षक कर्ज लेकर घर का खर्च चला रहे हैं, जबकि लगातार अनिश्चितता के कारण मानसिक तनाव भी बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि समय पर वेतन नहीं मिलने से उनके सामने रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी चुनौती बन गया है।
जीपीएफ प्रक्रिया में लापरवाही का आरोप
शिक्षकों ने जिला शिक्षा अधीक्षक (डीएसई) कार्यालय पर जीपीएफ (GPF) प्रक्रिया में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि करीब 500 शिक्षकों के जीपीएफ आवेदन अब तक संबंधित कार्यालय नहीं भेजे गए हैं। जानकारी के अनुसार लगभग 350 आवेदन ही भेजे गए, जिनमें से केवल 150 शिक्षकों को ही जीएफ संख्या आवंटित हो सकी है। इससे वेतन भुगतान की प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है।
अवैध वसूली के आरोप, उपायुक्त से हस्तक्षेप की मांग
बैठक के दौरान शिक्षकों ने बायोमेट्रिक हाजिरी, जीएफ खोलने और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं के नाम पर अवैध रूप से पैसे वसूले जाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पहले से आर्थिक तंगी झेल रहे शिक्षकों पर इस तरह का अतिरिक्त बोझ अनुचित है। शिक्षकों ने जिला उपायुक्त रामनिवास यादव से मामले में हस्तक्षेप कर शीघ्र वेतन भुगतान सुनिश्चित कराने की मांग की। उनका कहना था कि प्राथमिक शिक्षा निदेशक के निर्देश के बावजूद गिरिडीह में वेतन लंबित है, जबकि राज्य के कई अन्य जिलों में नवनियुक्त सहायक आचार्यों को वेतन मिल चुका है।
फेडरेशन ने जल्द समाधान की उठाई मांग
बैठक में झारखंड ऑफिसर टीचर एंप्लाइज फेडरेशन के प्रदेश एवं जिला पदाधिकारियों सहित बड़ी संख्या में सहायक आचार्य उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में लंबित वेतन का भुगतान, जीपीएफ प्रक्रिया में तेजी और शिक्षकों की समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग की।












