गिरिडीह (झारखंड): जमुआ प्रखंड के बंगारो गांव स्थित हीरोडीह थाना क्षेत्र में हुए चर्चित इंद्रदेव यादव हत्या कांड को लेकर राजनीतिक तनाव और जनाक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। मामले में केवल दो आरोपियों की गिरफ्तारी और मुख्य आरोपी सहित अन्य नामजद अपराधियों के फरार रहने पर जमुआ विधायक मंजू कुमारी ने पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
परिजनों की शिकायत के बाद गांव पहुंचीं विधायक
मृतक के परिजन और ग्रामीण जब न्याय की गुहार लेकर विधायक के पास पहुंचे, तो वह स्वयं गांव पहुंचीं और पीड़ित परिवार से मुलाकात कर पूरे मामले की स्थिति का जायजा लिया।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि हत्या जैसे गंभीर मामले में पुलिस की कार्रवाई बेहद धीमी है और मुख्य आरोपी अब तक गिरफ्तारी से बाहर हैं, जिससे क्षेत्र में असंतोष और आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
थाना प्रभारी से फोन पर हुई तीखी नोकझोंक
ग्रामीणों की शिकायत के बाद विधायक ने मौके से ही हीरोडीह थाना प्रभारी को फोन कर फरार आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की।
इसी दौरान बातचीत में माहौल गरमा गया और विधायक तथा थाना प्रभारी के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। ग्रामीणों का आरोप है कि थाना प्रभारी ने जनप्रतिनिधि के साथ असम्मानजनक व्यवहार किया, जिससे मौके पर मौजूद लोगों में नाराजगी और बढ़ गई।
ग्रामीणों का गुस्सा फूटा, प्रशासन पर उठे सवाल
घटना के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब एक जनप्रतिनिधि की बात को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा, तो आम जनता की शिकायतों पर कितना ध्यान दिया जाता होगा।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पुलिस केवल दो गिरफ्तारियों का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान रही है, जबकि मुख्य आरोपी अब भी खुलेआम फरार हैं।
विधायक का सख्त रुख, आंदोलन की चेतावनी
विधायक मंजू कुमारी ने स्पष्ट कहा कि हत्या कांड के आरोपियों को किसी भी कीमत पर बचने नहीं दिया जाएगा।
उन्होंने पुलिस प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द ही मुख्य आरोपी समेत सभी फरार अपराधियों की गिरफ्तारी नहीं हुई, तो जनता के साथ मिलकर बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
क्षेत्र में बढ़ता आक्रोश
इस पूरे मामले को लेकर क्षेत्र में लगातार चर्चा और आक्रोश बढ़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक सभी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती, तब तक न्याय अधूरा माना जाएगा।
हीरोडीह हत्या कांड अब केवल एक आपराधिक मामला नहीं रहा, बल्कि यह प्रशासनिक जवाबदेही और राजनीतिक दबाव का बड़ा मुद्दा बन चुका है। जनता और जनप्रतिनिधियों का बढ़ता दबाव आने वाले दिनों में इस मामले को और गर्म कर सकता है।











