21 जुलाई 2026
Giridih
गिरिडीह: नक्सल विरोधी अभियान में पुलिस को बड़ी सफलता, अनिता किस्कू ने छोड़ा हथियार
गिरिडीह पुलिस को नक्सल विरोधी अभियान में एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। भाकपा माओवादी संगठन की एरिया कमेटी सदस्य और 15 नक्सली मामलों में वांछित अनिता किस्कू उर्फ बबिता ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है। पुलिस का मानना है कि यह सरेंडर न केवल नक्सल विरोधी अभियान को नई मजबूती देगा, बल्कि जंगलों में सक्रिय अन्य उग्रवादियों के लिए भी एक सकारात्मक संदेश साबित होगा।
आत्मसमर्पण के बाद झारखंड सरकार की “नई दिशा-एक नई पहल” पुनर्वास नीति के तहत अनिता को आर्थिक सहायता सहित कई सरकारी सुविधाएं प्रदान की जाएंगी।
गिरिडीह एसपी ने प्रेस वार्ता में दी पूरी जानकारी
सोमवार को आयोजित प्रेस वार्ता में गिरिडीह एसपी डॉ. बिमल कुमार ने बताया कि अनिता किस्कू वर्ष 2009 से भाकपा माओवादी संगठन से जुड़ी हुई थी। वह लंबे समय तक पारसनाथ जोन, लुगू पहाड़ी, झुमरा पहाड़ी और कोल्हान क्षेत्र में सक्रिय रही।
उसके खिलाफ झारखंड के विभिन्न थानों में कुल 15 मामले दर्ज हैं। इनमें यूएपीए (UAPA), आर्म्स एक्ट, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और सीएलए एक्ट के तहत गंभीर मामले शामिल हैं।
हथियार, विस्फोटक और लेवी वसूली में थी सक्रिय
पुलिस के अनुसार संगठन में रहते हुए अनिता किस्कू हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटकों को छिपाने, लेवी वसूली कराने तथा अन्य नक्सली गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाती रही।
एसपी ने बताया कि संगठन के अंदर कथित शोषण, पुलिस की लगातार कार्रवाई और उसके पति अजय महतो की गिरफ्तारी के बाद उसका मनोबल टूट गया। इसी के बाद उसने हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया।
सरकार देगी ₹3 लाख की सहायता, मिलेगी सुरक्षा और पुनर्वास
झारखंड सरकार की “नई दिशा-एक नई पहल” आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत अनिता किस्कू को कुल 3 लाख रुपये की सहायता राशि दी जाएगी।
पुनर्वास पैकेज में क्या मिलेगा?
- कुल ₹3 लाख की आर्थिक सहायता
- ₹50 हजार की तत्काल सहायता राशि
- शेष राशि नियमानुसार प्रदान की जाएगी
- रहने और खाने की सुविधा
- सुरक्षा व्यवस्था
- पुनर्वास की सभी आवश्यक सुविधाएं
- न्यायालय में लंबित मामलों से जुड़े खर्च का वहन
सरकार का उद्देश्य आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादियों को सम्मानजनक जीवन की ओर वापस लाना है।
अनिता किस्कू की अपील- “हिंसा छोड़ें, मुख्यधारा में लौटें”
आत्मसमर्पण के बाद अनिता किस्कू ने नक्सलवाद को गलत रास्ता बताते हुए संगठन में सक्रिय अन्य नक्सलियों से भी हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने की अपील की।
उसने कहा कि सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ उठाकर सम्मानजनक जीवन जिया जा सकता है और हिंसा कभी भी किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकती।
पुलिस को उम्मीद, अन्य नक्सली भी करेंगे आत्मसमर्पण
गिरिडीह पुलिस का मानना है कि अनिता किस्कू के आत्मसमर्पण से नक्सल विरोधी अभियान को नई मजबूती मिलेगी। पुलिस को उम्मीद है कि इससे जंगलों में सक्रिय अन्य नक्सलियों का भी मनोबल टूटेगा और वे भी हथियार छोड़कर सामान्य जीवन अपनाने के लिए प्रेरित होंगे।












