गिरिडीह। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं ओडिशा के पूर्व राज्यपाल रघुवर दास मंगलवार को गिरिडीह पहुंचे। अपने दौरे के दौरान उन्होंने भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने पूर्व विधायक निर्भय कुमार शाहाबादी के आवास पहुंचकर उनकी दिवंगत पत्नी के निधन पर शोक संवेदना व्यक्त की। वहीं, बाद में वह दिवंगत झारखंड सरकार के मंत्री एवं गिरिडीह विधायक सुदिव्य कुमार सोनू के आवास पहुंचे और उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
न्यू परिसदन में भाजपा कार्यकर्ताओं ने किया स्वागत
रघुवर दास सबसे पहले न्यू परिसदन भवन पहुंचे। यहां भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनका बुके भेंट कर स्वागत किया। इस दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं से उन्होंने मुलाकात की और विभिन्न विषयों पर बातचीत की।
इसके बाद रघुवर दास पूर्व विधायक निर्भय कुमार शाहाबादी के आवास पहुंचे। यहां उन्होंने कुछ दिन पूर्व दिवंगत हुई पूर्व विधायक की पत्नी के निधन पर शोक जताया। उन्होंने शोकाकुल परिवार से मुलाकात कर अपनी संवेदना प्रकट की और परिजनों को इस कठिन समय में ढांढस बंधाया।
सुदिव्य कुमार सोनू को दी भावभीनी श्रद्धांजलि
रघुवर दास इसके बाद दिवंगत मंत्री एवं गिरिडीह विधायक सुदिव्य कुमार सोनू के आवास पहुंचे। यहां उन्होंने सुदिव्य कुमार सोनू के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। साथ ही उनके परिजनों से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की।
राजनीतिक योगदान और व्यक्तित्व को किया याद
इस दौरान रघुवर दास ने सुदिव्य कुमार सोनू के राजनीतिक व्यक्तित्व, कार्यशैली और सदन में उनके योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि सुदिव्य कुमार सोनू का अचानक हमलोगों को छोड़कर चले जाना बेहद हृदयविदारक है। आज भी विश्वास नहीं होता कि वह हमारे बीच नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि सुदिव्य कुमार सोनू के असामयिक निधन से झारखंड ने एक होनहार राजनेता को खो दिया है। विपक्ष को साथ लेकर चलने की उनकी जिंदादिली उनके व्यक्तित्व की बड़ी विशेषता थी।
“सदन में प्रभावशाली ढंग से रखते थे अपनी बात”
रघुवर दास ने कहा कि सुदिव्य कुमार सोनू ने कम समय में संसदीय ज्ञान हासिल किया और सदन में अपनी बात प्रभावशाली तरीके से रखते थे। उनकी संवाद शैली ऐसी थी कि सामने वाला पक्ष भी उनकी बात से संतुष्ट हो जाता था।
उन्होंने कहा कि सुदिव्य कुमार सोनू का राजनीतिक जीवन और उनका व्यवहार आने वाले समय में भी लोगों को प्रेरणा देता रहेगा। उनके निधन से झारखंड की राजनीति को अपूरणीय क्षति हुई है। अंत में उन्होंने शोकाकुल परिवार को इस कठिन समय में धैर्य और शक्ति मिलने की कामना की।





