SIR प्रक्रिया में फॉर्म नंबर-7 जमा करने को लेकर गरमाया मामला
गिरिडीह: पचंबा थाना क्षेत्र के वार्ड संख्या-2 के भाग संख्या-4 में SIR प्रक्रिया के दौरान एक जीवित महिला का नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए फॉर्म नंबर-7 जमा किए जाने का आरोप सामने आया है। मामला सामने आने के बाद मंगलवार को वार्ड संख्या-2 के सैकड़ों लोग पचंबा थाना पहुंचे और पुलिस को आवेदन देकर पूरे मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
मामले को लेकर राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गईं। झामुमो के गिरिडीह जिलाध्यक्ष संजय सिंह, डिप्टी मेयर सुमित कुमार सहित पार्टी के कई नेता और कार्यकर्ता थाना पहुंचे। प्रतिनिधिमंडल ने थाना प्रभारी से मुलाकात कर मामले की जांच और कार्रवाई की मांग की।
शाहिदा खातून ने थाने में दिया आवेदन
जीवित होने के बावजूद नाम हटाने का आरोप
वार्ड संख्या-2 निवासी शाहिदा खातून ने पचंबा थाना में आवेदन देकर बताया कि वह शहादत अंसारी की पत्नी हैं और भाग संख्या-4 की मतदाता हैं। उन्होंने कहा कि वह पूरी तरह जीवित हैं और वर्तमान पते पर ही रह रही हैं।
शाहिदा खातून का आरोप है कि इसके बावजूद भाजपा द्वारा नियुक्त भाग संख्या-4 के बीएलए-2 द्वारा उनका नाम मतदाता सूची से हटाने की मंशा से फॉर्म नंबर-7 जमा किया गया। उन्होंने इसे अपने मताधिकार और नागरिक अधिकारों को प्रभावित करने वाला मामला बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
करीब 25 मतदाताओं के नाम हटाने का आरोप
झामुमो जिलाध्यक्ष ने जांच की उठाई मांग
झामुमो जिलाध्यक्ष संजय सिंह ने आरोप लगाया कि वार्ड संख्या-2 के करीब 25 लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए कथित तौर पर फॉर्म नंबर-7 जमा किए गए हैं। उन्होंने कहा कि यदि जीवित मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाने का प्रयास किया गया है तो यह गंभीर मामला है।
उन्होंने जिला प्रशासन से पूरे मामले की जांच कराने, संबंधित लोगों को चिह्नित करने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की।
मतदाता सूची को लेकर बढ़ा विवाद
मामले के बाद वार्ड संख्या-2 में मतदाता सूची को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अब लोगों की नजर पुलिस और जिला प्रशासन की जांच पर है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है, यह देखने वाली बात होगी।
फिलहाल पुलिस को दिए गए आवेदन के आधार पर मामले की जांच की मांग की गई है। मतदाता सूची में नाम हटाने की प्रक्रिया और फॉर्म नंबर-7 के इस्तेमाल को लेकर सामने आए आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।






